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सूफ़ी काव्य पर बेला

14 अगस्त 2026

जगह-जगह 2.0 : रूमी और उनकी सात नसीहतें

जगह-जगह 2.0 : रूमी और उनकी सात नसीहतें

बाज़, चिड़िया और अनुवाद एक प्रसिद्ध तुर्की नाटक लैला व मजनूँ में ख़य्याम की एक रुबाई यूँ आती है : Her sabah yeni bir gün doğarken, Bir gün de eksilir ömürden; Her şafak bir hırsız gibidir Elin

24 दिसम्बर 2024

प्रेम का आईनाख़ाना

प्रेम का आईनाख़ाना

सूफ़ी साहित्य का कैनवास इतना विशाल है कि अक्सर तस्वीर का एक हिस्सा देखने में दूसरा हिस्सा छूट जाता है। इस तस्वीर में इतने रंग हैं और रंगों का ऐसा मेल-मिलाप है कि किसी एक रंग को ढूँढ़ना समझना लगभग नामुम

24 जून 2024

सूफ़ी आंदोलन के कुछ अनछुए पहलू

सूफ़ी आंदोलन के कुछ अनछुए पहलू

सन्यासी फ़क़ीर विद्रोह के नायक बाबा मजनू शाह आज़ादी के लिए देश में कई लड़ाईयाँ लड़ी गई हैं और कई स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना बलिदान दिया है। इतिहास में दर्ज पहला स्वाधीनता संग्राम फ़क़ीर-सन्यासी वि

22 जून 2024

गंगा-जमुनी तहज़ीब और हिंदुस्तानी सूफ़ीवाद

गंगा-जमुनी तहज़ीब और हिंदुस्तानी सूफ़ीवाद

हमारी इस साझा संस्कृति का निर्माण एक दिन में नहीं हुआ है। यह धीरे-धीरे विकसित हुई है। कई सामाजिक प्रयोग हुए हैं और अपने विरोधाभासों को किनारे रखकर समानताओं पर कार्य किया गया है। शुरूआती दौर का सूफ़ी-स

हिन्दवी उत्सव 2026

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