धर्म पर कहानियाँ
धारयति इति धर्म:—यानी
जिसने सब कुछ धारण कर रखा है, वह धर्म है। इन धारण की जाती चीज़ों में सत्य, धृति, क्षमा, अस्तेय, शुचिता, धी, इंद्रिय निग्रह जैसे सभी लक्षण सन्निहित हैं। धर्म का प्रचलित अर्थ ‘रिलीज़न’ या मज़हब भी है। प्रस्तुत चयन में धर्म के अवलंब पर अभिव्यक्त रचनाओं का संकलन किया गया है।
क्या तुमने कभी कोई सरदार भिखारी देखा?
एक तारीख़ की शाम अजमेर से रवाना होकर हम दो की सुबह साढ़े पाँच बजे दिल्ली पहुँचे। हमें निजामुद्दीन से पौने सात बजे दूसरी गाड़ी पकड़नी थी और कुलियों ने बताया कि आज रिक्शा-टैक्सी कुछ नहीं चल रहे हैं, इसलिए हम छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस से नई दिल्ली तक आए। वहाँ