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झूठ पर ग़ज़लें

झूठ मिथ्या या असत्य

वचन है। इसे सत्य का छद्म या भ्रम भी कहा जाता है। यहाँ झूठ शब्द-केंद्र पर परिधि पारती कविताओं का एक चयन प्रस्तुत है।

सब फूल हमरा

जौहर शफियाबादी

लगल बा आग

मिथिलेश ‘गहमरी’

पास आके समय

अशोक द्विवेदी

रोज भिहिलत देवाल

मिथिलेश ‘गहमरी’

तबहूँ प्यासल गगरी बा

रमाकान्त मुकुल

फूल पर 'करफू

मिथिलेश ‘गहमरी’