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मनुष्य पर दोहे

फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।

कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार

निज़ाम फतेहपुरी

चमक-दमक को देखकर, दुनिया में इंसान।

भूल गया है मौत को, कितना है नादान॥

निज़ाम फतेहपुरी