फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।
कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार
चमक-दमक को देखकर, दुनिया में इंसान।
भूल गया है मौत को, कितना है नादान॥
फ़ितरत है इंसान की, सबके अलग विचार।
कुछ तो सच को सच कहें, कुछ करते इनकार
चमक-दमक को देखकर, दुनिया में इंसान।
भूल गया है मौत को, कितना है नादान॥