लोकदूत देवेंद्र सत्यार्थी : बेला फूले आधी रात
न थका न रुका न हटा न झुका किसी फक्कड़ बाबा का मैं चेला हुआ हजारीप्रसाद द्विवेदी की उपर्युक्त काव्य-पंक्ति के प्रेरणा पुंजों में कबीर, बनारसीदास चतुर्वेदी आदि का नाम आता है, पर ‘एक युग : एक प्रतीक’
विज्ञान कथा : दंभ
अप्रैल, सन् 2101 यूँ धरती के सीने पर उगी आधुनिकतम संरचनाओं ने उसे एक विशिष्ट सौंदर्य प्रदान किया है, लेकिन कुछ ज़ख़्म ऐसे हैं जो छिप नहीं पाते। ये ज़ख़्म जलवायु परिवर्तन ने दिए हैं। अप्रैल-मई माह
‘2147’ : भविष्य की एक ज़रूरी चेतावनी
लीलानूर सेंटर फ़ॉर वॉयस एंड डांस में पारंगद शॉ द्वारा लिखित और बलराम झा द्वारा निर्देशित नाटक ‘2147’ का मंचन—कैटेलिस्ट थिएटर सोसायटी और काव्यपीडिया के संयुक्त तत्वावधान में—सफलता के साथ किया गया। यह