विशुद्ध व्याकरण और परिभाषा आदि के द्वारा घटना का बखान करने से ही यदि घटना का पूरा बखान हो जाता तो साहित्य समाचार-पत्रों में ही बंद रहता।
ईश्वर विवरण में है।
कला वस्तुमात्र नहीं है, न वस्तु की तरह उसकी व्याख्या की जा सकती है।