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सुख पर गीत

आनंद, अनुकूलता, प्रसन्नता,

शांति आदि की अनुभूति को सुख कहा जाता है। मनुष्य का आंतरिक और बाह्य संसार उसके सुख-दुख का निमित्त बनता है। प्रत्येक मनुष्य अपने अंदर सुख की नैसर्गिक कामना करता है और दुख और पीड़ा से मुक्ति चाहता है। बुद्ध ने दुख को सत्य और सुख को आभास या प्रतीति भर कहा था। इस चयन में सुख को विषय बनाती कविताओं का संकलन किया गया है।

इसकी मुझको लाज नहीं है

हरिवंशराय बच्चन

अबकी बार हुई है बारिश

विभूति तिवारी

दो दिन होली रही गाँव में

ज्ञान प्रकाश आकुल

खिल उठे मनवा उदास

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

हरसे किसनवां

रामबहादुर ‘अधीर पिण्डवी’

घर

मनोज जैन

कितना कठोर

मनोज जैन

गीत-गीत भेल

शान्ति सुमन

जितना दुख देता है

विनोद श्रीवास्तव

रिटायरमेंट का गीत

जय चक्रवर्ती

प्रार्थना को मौन भाया

विकास आर्य स्वप्न