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Kumar Manglam's Photo'

कुमार मंगलम

1992 | कैमूर, बिहार

नई पीढ़ी के कवि-आलोचक।

नई पीढ़ी के कवि-आलोचक।

कुमार मंगलम के बेला

18 जनवरी 2025

आज़ादी मिथ है... हम किसके ग़ुलाम हैं !

आज़ादी मिथ है... हम किसके ग़ुलाम हैं !

तुम्हारी अधेड़ नादानियों को कैसे नज़रअंदाज़ किया जा सकता है? इस नुक़्ते पर सोचते हुए घृणा या नफ़रत नहीं होती। अगर मैं कहूँ कि तरस आता है तुम पर, तो यह तुमसे अधिक अपने आप पर ज़्यादती होगी क्योंकि बहुत

10 जुलाई 2024

आजकल लोग पैदा नहीं होते अवतरित होते हैं

आजकल लोग पैदा नहीं होते अवतरित होते हैं

सोचता हूँ कुछ लिखूँ पर लिखने के उत्साह पर अवसाद भारी है। ~ भाषा का बुनियादी ताना-बाना शब्दों से कहीं अधिक प्रयोगों से निर्मित होता है। आजकल लोग पैदा नहीं होते अवतरित होते हैं। वाक्यों में दो क्

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