बुल्ले शाह के उद्धरण

मुल्ला और मशालची दोनों एक ही मत के हैं। औरों को तो ये प्रकाश देते हैं और स्वयं अंधकार में फँसे रहते हैं।
-
शेयर
- सुझाव
- प्रतिक्रिया

और कोई बातें हैं ही नहीं, केवल ईश्वर ईश्वर ही एक बात है। यह रोला कुछ तो इन विद्वानों ने और कुछ इन किताबों के झमेले ने मचा रखा है।
-
शेयर
- सुझाव
- प्रतिक्रिया

गया जाने से बात समाप्त नहीं होती, वहाँ जाकर चाहे तू कितना ही पिंडदान दे। बात तो तभी समाप्त होगी, जब तू खड़े-खड़े इस 'मैं' को लुटा दे।
-
शेयर
- सुझाव
- प्रतिक्रिया