ममता पंडित के बेला
अपराध की सज़ा लड़कियाँ क्यों भुगतें?
आज के कुछ रोज़ पूर्व बिहार के जमुई में घटी घटना और ऐसी तमाम वारदातों के परिणाम केवल तात्कालिक नहीं होते, उनके असर बेहद दूरगामी होते हैं। हमारे समाज की संकीर्ण मानसिकता को बदलने में दशकों का संघर्ष लगा
छरहरी काया की माया
इस विषय पर बहुत समय से कुछ लिखना चाह रही थी। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद अभिनेत्री कटरीना कैफ़ को लेकर आई भद्दी टिप्पणियों ने जैसे कोई पुराना ज़ख्म कुरेद दिया। कटरीना कुछ ही समय पहले
जेन-ज़ी : एक माफ़ीनामा
इसे कोई सामान्य लेख नहीं, बल्कि एक माफ़ीनामा समझिए। यह माफ़ीनामा मेरी ही नहीं, मेरी पूरी पीढ़ी की ओर से उस पीढ़ी के नाम है, जिसे आज हम ‘जेन-ज़ी’ [Gen Z] कहते हैं। इधर कुछ दिनों में इस पीढ़ी ने अपन
सतलुज : एक धारा को रोकने की कोशिश
तीन साल की लंबी क़ानूनी और सेंसर संबंधी लड़ाई के बाद रिलीज़ हुई फिल्म ‘सतलुज’ मात्र दो दिन के भीतर ही भारत में ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ZEE 5 से हटा दी गई। अब यह फ़िल्म भारत में उपलब्ध नहीं है। सरकार ने इसे स
मैं वापस आऊँगा : हमन हैं इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या
इम्तियाज़ अली की फ़िल्मों के लाखों दीवानों में एक दीवानी मैं भी हूँ। क्या वजह है इस दीवानगी की... इसका जवाब है कनेक्ट या जुड़ाव। आप उनकी फ़िल्मों के किरदारों से जुड़ पाते हो और फ़िल्म ख़त्म होते-होते प
जीवन से हारते बच्चे : दबाव, डर और टूटती उम्मीदें
दसवीं, बारहवीं और प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो चुके हैं। नतीजों का मौसम ख़ुशियों के बजाय अब डर पैदा करने लगा है क्योंकि आए दिन परीक्षाओं में विफल होने पर बच्चों के आत्महत्या कर लेने की ख़बर
अस्सी : ‘तय करो, इसके नीचे हम नहीं फिसलेंगे’
‘अस्सी’ आपको झकझोरती है, असहज करती है। वह ऐसे प्रश्न सामने रखती है, जिन्हें हम वर्षों से टालते आए हैं। वह हमें हमारे ही समय के कठोर सच से रूबरू कराती है। क्यों आज भी इस देश में प्रतिदिन लगभग अस्सी बल