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स्त्री पर गीत

स्त्री-विमर्श भारतीय

समाज और साहित्य में उभरे सबसे महत्त्वपूर्ण विमर्शों में से एक है। स्त्री-जीवन, स्त्री-मुक्ति, स्त्री-अधिकार और मर्दवाद और पितृसत्ता से स्त्री-संघर्ष को हिंदी कविता ने एक अरसे से अपना आधार बनाया हुआ है। प्रस्तुत चयन हिंदी कविता में इस स्त्री-स्वर को ही समर्पित है, पुरुष भी जिसमें अपना स्वर प्राय: मिलाते रहते हैं।

मैं नीर भरी

महादेवी वर्मा

खिली थी, झर गई बेला

देवेंद्र कुमार बंगाली

परदेस पिया के ना धारे!

तैयब हुसैन पीड़ित

बिटिया

अशोक अज्ञानी

हमनीं का रहब जानी

महेन्द्र मिसिर

लाली-लाली डोलिया

भोलानाथ गहमरी

बदरा ले जा सनेस

भोलानाथ गहमरी

कलकतवा से मोर पिया

महेन्द्र मिसिर

मन के मंजीरे

प्रसून जोशी

मैं पथ भूली

महादेवी वर्मा

नहीं हलाहल शेष...

महादेवी वर्मा

जनि जा बिदेस

भोलानाथ गहमरी

तोरे बीनु लागे न जीया

भोलानाथ गहमरी

प्रेम-पराग

धीरेन्द्र प्रेमर्षि

कहीं भींजे न कजरा

भोलानाथ गहमरी

ना जाने कजरा के मोल

भोलानाथ गहमरी

बोलि उठे कोइलरिया

भोलानाथ गहमरी

पटना से बैदा बोलाइ दऽ

महेन्द्र मिसिर

दुलहिन

गोपालशरण सिंह

वैशाली का रुदन गीत

हरिहर प्रसाद चौधरी ‘नूतन’

नारी

नरेंद्र शर्मा

देव-दासी

गोपालशरण सिंह

वारांगना

गोपालशरण सिंह

विधवा

गोपालशरण सिंह

मानवी

गोपालशरण सिंह