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वसंत पर गीत

वसंत को ऋतुराज कहा गया

है, जब प्रकृति शृंगार करती है। प्रकृति-काव्य का यह प्रमुख निमित्त रहा है। नई कविताओं ने भी वसंत की टेक से अपनी बातें कही हैं। इस चयन में वसंत विषयक कविताओं को शामिल किया गया है।

सखि वसंत आया

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

गंध मदन के

भोलानाथ गहमरी

आउ, हम वसन्तकेँ बजाबी

मार्कण्डेय प्रवासी

चमकैए पुतरी

अशोक कुमार मेहता

बसन्त रितु रंग भरे

अशोक द्विवेदी

गमकैए अङना दलान

अशोक कुमार मेहता

बोलि उठे कोइलरिया

भोलानाथ गहमरी

वसन्ते-बिरहिनी

कालीकान्त झा ‘बूच’

सुभ सुभ सुभ नया साल हो

रामजियावान दास ‘बावला’

सखि फागुन आइल

रामजियावान दास ‘बावला’

अयलै वसंत विभोर

अशोक कुमार मेहता

वसंत की प्रतीक्षा

जयशंकर प्रसाद

वसंत

जयशंकर प्रसाद