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वसंत पर गीत

वसंत को ऋतुराज कहा गया

है, जब प्रकृति शृंगार करती है। प्रकृति-काव्य का यह प्रमुख निमित्त रहा है। नई कविताओं ने भी वसंत की टेक से अपनी बातें कही हैं। इस चयन में वसंत विषयक कविताओं को शामिल किया गया है।

सखि वसंत आया

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

गंध मदन के

भोलानाथ गहमरी

बसन्त रितु रंग भरे

अशोक द्विवेदी

आउ, हम वसन्तकेँ बजाबी

मार्कण्डेय प्रवासी

वसन्ते-बिरहिनी

कालीकान्त झा ‘बूच’

बोलि उठे कोइलरिया

भोलानाथ गहमरी

सुभ सुभ सुभ नया साल हो

रामजियावान दास ‘बावला’

सखि फागुन आइल

रामजियावान दास ‘बावला’

वसंत की प्रतीक्षा

जयशंकर प्रसाद

वसंत

जयशंकर प्रसाद

हिन्दवी उत्सव 2026

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