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सन्नाटा पर गीत

सन्नाटा का अर्थ है—स्तब्धता,

ख़ामोशी, मौन। यह निर्जनता और एकांत का भी अर्थ देता है। रूपक में सन्नाटा चीख़ का विलोम भी हो सकता है, चीख़ का प्रतिरोध और पर्याय भी। प्रस्तुत चयन में शामिल कविताओं में सन्नाटे की आवाज़ को बख़ूबी सुना जा सकता है।

आब चुप रहने चलत नहि काज

मार्कण्डेय प्रवासी

जी सकूँ चुपचाप

शंभुनाथ सिंह

चरण गहे थे मौन रहे थे

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

अव्यवस्थित

जयशंकर प्रसाद

एक ख़ामोशी हमारे बीच है

विनोद श्रीवास्तव