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सन्नाटा पर ग़ज़लें

सन्नाटा का अर्थ है—स्तब्धता,

ख़ामोशी, मौन। यह निर्जनता और एकांत का भी अर्थ देता है। रूपक में सन्नाटा चीख़ का विलोम भी हो सकता है, चीख़ का प्रतिरोध और पर्याय भी। प्रस्तुत चयन में शामिल कविताओं में सन्नाटे की आवाज़ को बख़ूबी सुना जा सकता है।

उठ रहल केकर

कृष्णानन्द कृष्ण

सब समय के धार

कृष्णानन्द कृष्ण

गाँव जे शहर

कृष्णानन्द कृष्ण