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ज़िज़ेक से एक बातचीत

स्लावोज ज़िज़ेक प्रसिद्ध दार्शनिक और सांस्कृतिक आलोचक हैं। वह मार्क्सवाद, मनोविश्लेषण और हीगेल के विचारों से लेकर सिनेमा, पॉप कल्चर, पॉपुलर घटनाओं का इस्तेमाल करके समकालीन समय का क्रिटिक पेश करते हैं। कई बार वह अपनी बातों से दिलचस्प ढंग से चौंकाते भी हैं और उनके विचार अंतर्विरोधपूर्ण भी लगते हैं, जोकि उनके लेखन को इस समय का रूपक बनाने में मदद ही करते हैं। यहाँ प्रस्तुत यह अनौपचारिक साक्षात्कार ‘गार्जियन’ में वर्ष 2008 में  प्रकाशित हुआ था। इसमें भी उन्होंने अपने ख़ास अंदाज़ में प्रश्नों के जवाब दिए हैं...

मनोज कुमार झा

हमें अपने ख़ुशी के कुछ पलों के बारे में बताएँ?

बस कुछ गिने-चुने पल। वह भी जब ऐसे पलों की कल्पना करता था या फिर जब वे बीत जाते थे। जब वे घटते हैं, तब बिल्कुल नहीं।

आपका सबसे बड़ा डर?

मरने के बाद फिर से जीवित हो जाने का। इसलिए मैं चाहता हूँ कि मुझे मरने के तुरंत बाद दफ़्न कर दिया जाए।

आपकी सबसे पुरानी स्मृति?

अपनी माँ, पूरी तरह नग्न। भयानक!

किस जीवित व्यक्ति का आप सबसे ज़्यादा एहतिराम करते हैं?

हैती के दो बार पदच्युत किए गए राष्ट्रपति जां-बत्रा का। वह इस बात की मिसाल हैं कि ख़ौफ़नाक रूप से निराशाजनक परिस्थितियों में भी लोगों के लिए क्या किया जा सकता है।

लोगों की कौन-सी आदत आपको सबसे बुरी लगती है?

उनकी मदद करने की बनावटी उत्सुकता, जबकि मुझे उसकी कोई ज़रूरत या चाहत भी नहीं रहती।

ज़मीन-जायदाद को छोड़कर आपने कौन-सी सबसे महँगी चीज़ ख़रीदी है?

‘हीगेल समग्र’ का सबसे नया जर्मन संस्करण।

वह चीज़ जिसे आप सँभालकर रखते हैं?

यही। हीगेल समग्र।

आपके शक्ल-ओ-सूरत की कौन-सी चीज़ है, जो आपको सबसे बुरी लगती है?

यही कि मेरा शरीर उसी तरह दिखता है, जैसा कि वह  है।

किसी फ़ैंसी ड्रेस पार्टी में आप क्या पहनकर जाना पसंद करेंगे?

अपने चेहरे पर अपने चेहरे का मुखौटा लगाकर। इससे लोग मेरे स्वयं ही होने को मेरा स्वाँग समझेंगे।

आपने अपने माता-पिता से क्या ग्रहण किया?

कुछ भी नहीं। मैं उनकी मौत पर एक मिनट के लिए भी शोक में नहीं रहा।

किनसे आप सबसे गहराई से क्षमा माँगना चाहेंगे और क्यों?

अपने बेटों से। मैं अच्छा पिता नहीं हो सका।

प्रेम की अनुभूति कैसी लगती है?

बहुत बड़ा दुर्भाग्य! भयंकर कीड़ा! मुसलसल मौजूद संकट जैसी अवस्था जो सभी छोटी-छोटी ख़ुशियों को लील जाती है।

आपका प्रिय?

दर्शन। मैं चुपके-चुपके सोचता हूँ कि यथार्थ जैसी कोई चीज़ तो है, जिसके बारे में मैं अनुमान लगाता रहता हूँ।

कभी ऐसा हुआ है कि आपने प्रेम का इज़हार किया हो, पर आपको प्रेम नहीं हो?

हमेशा। दरअस्ल, मैं जब प्रेम करता हूँ तो चुभने वाली या बुरी लगने वाली बातें कहता रहता हूँ।

कौन लोग आपको सबसे बुरे लगते हैं?

वे डॉक्टर जो लोगों को यातना देने में सहयोग करते हैं।

आपने सबसे बुरा जॉब कौन-सा किया?

पढ़ाने का। मुझे छात्रों से नफ़रत है। उनमें से अधिकांश, बाक़ी लोगों की तरह ही, मूर्ख और बोर होते हैं।

आपकी सबसे बड़ी निराशा?

साम्यवाद का विनाशकारी पराभव।

अगर आप अपने अतीत को बदल सकते तब क्या बदलते?

जन्म नहीं लेता। यहाँ मैं सोफोक्लीज़ से सहमत हूँ कि सबसे बड़ा सौभाग्य है जन्म नहीं ले पाना। लेकिन जैसा कि मज़ाक़ में कहा जाता है—कुछ ही लोग ऐसा कर पाते हैं।

बीते हुए समय में जा सकें तो किन दिनों में जाना चाहेंगे?

उन्नीसवीं सदी की जर्मनी में—हीगेल से दर्शनशास्त्र पढ़ने।

आपको अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि क्या लगती है?

अपने लेखन में, जहाँ मैं हीगेल का ठीक से भाष्य कर पाया हूँ।

ज़िंदगी से सबसे महत्त्वपूर्ण चीज़ आपने क्या सीखी?

यही कि ज़िंदगी बेतुकी, बेमतलब की चीज़ है जो आपको कुछ भी सिखा नहीं सकती।

कोई राज़ की बात बताइए?

यही कि साम्यवाद की जीत होगी।

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