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वियोग पर ग़ज़लें

वियोग संयोग के अभाव

या मिलाप न होने की स्थिति और भाव है। शृंगार में यह एक रस की निष्पत्ति का पर्याय है। माना जाता है कि वियोग की दशा तीन प्रकार की होती है—पूर्वराग, मान और प्रवास। प्रस्तुत चयन में वियोग के भाव दर्शाती कविताओं का संकलन किया गया है।

आम महफिल में बनिके खास रहीं

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

वक्त के मार सह रहल बानी

नागेन्द्र प्रसाद सिंह

नींद के राह कहीं छूट रहल बा पाछे

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

बेवफा एह जिन्दगी

कृष्णानन्द कृष्ण

सहबाक जे सन्ताप अछि

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

रउआ कइसे ई बतिया भुला जाइले

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

मीठ-मीठ दर्द हमर

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी

हृदयकेर तार छिनायल

सुधांशु ‘शेखर’ चौधरी