साहस पर बेला
साहस वह मानसिक बल या
गुण है, जिसके द्वारा मनुष्य यथेष्ट ऊर्जा या साधन के अभाव में भी भारी कार्य कर बैठता है अथवा विपत्तियों या कठिनाइयों का मुक़ाबला करने में सक्षम होता है। इस चयन में साहस को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।
निम्स दाई! हिमाल आपको बुला रहे हैं...
Giving up is not in the blood, Sir! Not in the blood. — Nirmal ‘Nimsdai’ Purja 30 जुलाई 2026 | दिल्ली/काराकोरम उस दिन दिल्ली मेट्रो से दफ़्तर जाते हुए, मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था कि इस समय निर्म
राहुल सांकृत्यायन को 2026 में पढ़ना कैसा है?
मैं Clarice Lispector, Annie Ernaux और Han Kang के बीच राहुल सांकृत्यायन को पढ़ रही थी। क्या यह सही फ़ैसला था? पता नहीं। कुछ ही दिनों पहले; मैं 1950 के पेरिस की सैर कर रही थी, और उसके कुछ दिन बाद मैं
कहानी : लुटेरी तवायफ़ें
शादियों का सीज़न आते ही रेशमा तैयारी करना शुरू कर देती। मेकअप से थोड़ा घबराती थी, लेकिन उम्र छुपाने की जद्दोजहद रहती थी हमेशा। चेहरे को कैसे सवारें, क्या करें, क्या न करें—ये सब परपंच उसे समझ नहीं आते।
02 अक्तूबर 2024
हे राम : दास्तान-ए-क़त्ल-ए-गांधी
जिससे उम्मीदें-ज़ीस्त थी बाँधी ले उड़ी उसको मौत की आँधी गालियाँ खाके गोलियाँ खाके मर गए उफ़्फ़! महात्मा गांधी! — रईस अमरोहवी एक दिल्ली में वह मावठ का दिन था। 30 जनवरी 1948 को दुपहर तीन बज
कारगिल विजय की शौर्यगाथा दर्शाती फ़ोटो प्रदर्शनी का शुभारंभ
26 जुलाई 2024 को—कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगाँठ है। इस अवसर पर देश भर में ‘कारगिल विजय रजत जयंती महोत्सव’ मनाया जा रहा है। भारत सरकार की इस पहल पर नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया और दिल्ली मेट्रो रेल कॉ
14 अप्रैल 2024
लोग क्यों पढ़ते हैं अंबेडकर को?
यह सन् 2000 की बात है। मैं साकेत कॉलेज, अयोध्या में स्नातक द्वितीय वर्ष का छात्र था। कॉलेज के बग़ल में ही रानोपाली रेलवे क्रॉसिंग के पास चाय की एक दुकान पर कुछ छात्र ‘क़स्बाई अंदाज़’ में आरक्षण को लेकर