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भवभूति

भवभूति के उद्धरण

जो वेदों का अध्ययन तथा उपनिषद्, साँख्य और योगों का ज्ञान है, उनके कथन से क्या फल है? क्योंकि उनसे नाटक में कुछ भी गुण नहीं आता है। यदि नाटक के वाक्यों की प्रौढ़ता और उदारता तथा अर्थ-गौरव है, तो वही पांडित्य और विदग्धता की सूचक है।

नारियों का चित्त फूल जैसा कोमल होता है।

सभी वस्तुओं की अति दोष उत्पन्न करती है।

दुष्ट का निग्रह किसके हृदय को अच्छा नहीं लगता?

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मंद हास्य से उज्ज्वल दृष्टि का वितरण करो।

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