मनीष कुमार मौर्य के बेला
पत्र : कल्पना शास्त्री के लिए : मुझसे नहीं होगा समीक्षा का काम
स्वस्ति श्री सर्वोपमायोग्य कल्पना शास्त्री जी, यहाँ से मनीष का राम-राम। चकित होऊ नका; मैं भी जानता हूँ कि चिट्ठी-पत्री की परंपरा तो अब बहुत पुरानी हो चुकी है। सो भी, मैं आपको चिट्ठी लिखने बैठ गया।
27 जून 2025
आचार्य शुक्ल के इतिहास के बहाने : आदिकाल के अप्रासंगिक होने पर सवाल?
सास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ। —३६, अरण्यकाण्ड, श्रीरामचरितमानस तुलसी की इस पंक्ति का शीर्षक रूप में प्रयोग करते हुए ‘नागरीप्रचारिणी सभा’ द्वारा आचार्य रामचंद्र शुक्ल के पुनर्संस्कारित इतिहास