वृंदावन पर दोहे

वृंदावन एक प्रमुख धार्मिक

और ऐतिहासिक नगर है, जिसका संबंध कृष्ण से है। इसे ब्रज का हृदय-स्थल कहा जाता है। कंस के अत्याचार से बचने के लिए नंद अपने कुटुंबियों संग वृंदावन में ही आश्रय लेने पहुँचे थे और यही स्थल कृष्ण की बाल-लीलाओं का साक्षी बना था। कालिदास ने भी इंदुमती-स्वयं के प्रसंग में वृंदावन का उल्लेख किया है।

कहि सकत रसना कछुक, प्रेम-स्वाद आनंद।

को जानै ‘ध्रुव' प्रेम-रस, बिन बृंदावन-चंद॥

ध्रुवदास

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