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छाया पर बेला

छाया, छाँव, परछाई विषयक

कविताओं का चयन।

02 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

छायालीन यह दृश्य है या एक ठहरा हुआ उच्चारण! जैसे समय ने अपनी जीभ बाहर निकाल शब्द को अधूरा छोड़ दिया हो। क्षितिज पर शहर कोई ठोस आकृति नहीं, धुंध का अभ्यास है। वह अपने होने को सिद्ध नहीं करता, संकेत