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नदी पर गीत

नदियों और मानव का आदिम

संबंध रहा है। वस्तुतः सभ्यता-संस्कृति का आरंभिक विकास ही नदी-घाटियों में हुआ। नदियों की स्तुति में ऋचाएँ लिखी गईं। यहाँ प्रस्तुत चयन में उन कविताओं को शामिल किया गया है, जिनमें नदी की उपस्थिति और स्मृति संभव हुई है।

अगर नदी में लहर न होती

विनोद श्रीवास्तव

नदी के तीर पर ठहरे

विनोद श्रीवास्तव

पहले हमें नदी का सपना

विनोद श्रीवास्तव

केवट बोलल रामचन्द्र से

रामजियावान दास ‘बावला’

कइसे लेहीं उतराई हो

रामजियावान दास ‘बावला’

नदी आ पहाड़

शान्ति सुमन

नीम तरु से

किशन सरोज

नदिया रस्ता भूल गई

अन्नू रिज़वी

फिर नदी अचानक सिहर उठी

विनोद श्रीवास्तव

मौसम की मार

श्यामबिहारी श्रीवास्तव

आज नदी में पाँव डुबाते

विनोद श्रीवास्तव

हिन्दवी उत्सव 2026

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