चे ग्वेरा : एक समर्पित क्रांतिकारी का एक पूँजीवादी चीज़ में बदलना
रजिस देब्रे ने बोलिविया की जेल में चे ग्वेरा का साक्षात्कार लिया था। बाद में उन्होंने लिखा, “चे आधुनिक युग के ईसा मसीह हैं, बल्कि मुझे लगता है कि उन्हें उससे भी अधिक यातना सहनी पड़ी। दो हज़ार वर्ष पहल
09 जून 2026
कॉकरोच और क्रांति!
भारत एक अपवाद है और भारतीयता स्वयं अनेक अपवादों का समुच्चय है। जब भी आपको यह आभास होगा कि आपने भारत को समझ लिया है—इसके लोग, इसकी संस्कृति और इसकी राजनीति आपको पुनः चौंका देगी। भारत का लोकतांत्रिक, आ
04 मई 2026
वे बंगाली लड़कियाँ आततायी नहीं थीं!
वे अनपेक्षित बाढ़ की तरह आती रहीं। उनका पानी मैला नहीं था, न ही उतना साफ़। वे मेरे भीतर बने घर को—जो पहले से खंडहर था और खंडहर करती चली गईं। वे खुला मैदान चाहती थीं, जिसमें वे अपने मुताबिक़ खेलना और
शपथ पर ग्रहण
वह श्वेतवस्त्रधारिणी अचानक मेरे सामने उपस्थित हो गई। उस म्लानमुख, नतशीश नायिका ने आते ही आग्रह किया—“मुझे ग्रहण करें कवि!” मैंने अपरिचय की दीवार को ढाहने के उद्देश्य से प्रश्न किया—“पहले अपना नाम
बल के बारे में
श्रम काग़ज़ है। कर्म हस्ताक्षर। व्यक्ति को अपना काम करना चाहिए। मेहनत से। ईमानदारी से। समर्पण से। सजगता के साथ और अद्यतन कर्मठता से। लेकिन कर्म करने से पहले चुनाव करना ही चाहिए कि कौन-सा काम करने योग्य