Font by Mehr Nastaliq Web

होंठ पर कविताएँ

प्रेम और शृंगार की अभिव्यक्तियों

में कवियों का ध्यान प्रमुखता से होंठों पर भी रहा है। होंठों की सुंदरता और मुद्राएँ कवियों का मन मोह लेती हैं। प्रस्तुत चयन में होंठ को साध्य-साधन रखती कविताओं को शामिल किया गया है।

गुनाह का दूसरा गीत

धर्मवीर भारती

गुनाह का गीत

धर्मवीर भारती

बोझ

गीत चतुर्वेदी

गुलाब, लगभग होंठ...

यूजें गिलविक

अभिलाषा

कुंजकिरण

जल रहा है

केदारनाथ अग्रवाल

होंठों की जुंबिश

प्रदीप्त प्रीत

पहला प्यार

साैमित्र मोहन

वह

अतुलवीर अरोड़ा

हिन्दवी उत्सव 2026

रजिस्टर कीजिए