होंठ पर उद्धरण
प्रेम और शृंगार की अभिव्यक्तियों
में कवियों का ध्यान प्रमुखता से होंठों पर भी रहा है। होंठों की सुंदरता और मुद्राएँ कवियों का मन मोह लेती हैं। प्रस्तुत चयन में होंठ को साध्य-साधन रखती कविताओं को शामिल किया गया है।
जब इस प्रकार से दंतक्षत किया जाए कि अधरों पर केवल हल्की लाली दिखाई दे और इसमें दाँत का घाव छिपा रहे, उसे 'गूढक' दंतक्षत कहते हैं।
जब अधर को दाँतों से कसकर दबाया जाता है; जिससे अधर पर कुछ सूजन आ जाती है, तो उसे 'उच्छूनक' दंतक्षत कहते हैं।