कवियों की सूची

सैकड़ों कवियों की चयनित कविताएँ

मेवाड़ नरेश राजसिंह के दरबारी कवि। सामान्य विषय-वस्तु के विस्तृत वर्णन में सिद्धहस्त।

नवें दशक के सुपरिचित हिंदी कवि।

अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तीसरा सप्तक’ के कवि।

मध्व संप्रदाय के वैष्णव भक्त। पदों में सूफ़ीज़्म और सगुण भक्ति का सामजंस्य।

छायावादी दौर के चार स्तंभों में से एक। कविता के साथ-साथ अपने रेखाचित्रों के लिए भी प्रसिद्ध। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित।

अकबर के दरबारी कवि। भक्ति और नीति संबंधी कविताओं के लिए स्मरणीय।

सुपरिचित कवि-कलाकार और अनुवादक।

राष्ट्रकवि के रूप में समादृत कवि। ‘भारत भारती’ उल्लेखनीय काव्य-कृति।

कवि, लेखक और पत्रकार। साहित्य-संसार में 'एक भारतीय आत्मा' के नाम से स्मरणीय।

सातवें दशक के कवि। आलोचना और कहानियाँ भी लिखीं।

भक्ति-काव्य की निर्गुण धारा के अंतर्गत समाहित सूफ़ी काव्य के अत्यंत महत्वपूर्ण कवि। ‘पद्मावत’ कीर्ति का आधार-ग्रंथ।

नवें दशक में उभरे कवि। दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

एक समय की सुपरिचित कवयित्री, लेकिन अब अलक्षित।

सगुण भक्ति परंपरा के संत कवि। ‘अजगर करे ना चाकरी...’ जैसी उक्ति के लिए स्मरणीय।

हिंदी के उल्लेखनीय कवि-आलोचक। अपनी डायरियों के लिए विशेष चर्चित, लेकिन अब अलक्षित।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

सुपरिचित अभिनेता और रंगकर्मी। समय-समय पर गद्य और कविता-लेखन।

सुपरिचित कवि। लोक-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

सरस फागों के लिए स्मरणीय।

सरस कल्पना के भावुक कवि। स्वभाविक, चलती हुई व्यंजनापूर्ण भाषा के लिए स्मरणीय।

आठवें दशक के प्रमुख कवि-लेखक और संपादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

सुपरिचित कवि।

रीतिकालीन कवि गोकुलनाथ के शिष्य और महाभारत के भाषा अनुवादक।

इस सदी में सामने आईं हिंदी की प्रमुख कथाकार। समय-समय पर काव्य-लेखन भी।

समय : अज्ञात। कोमल कल्पना और स्निग्ध सहृदयता के सूफ़ी कवि।

इस सदी में सामने आए हिंदी कवि-अनुवादक। कुछ कहानियाँ भी लिखीं। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

शृंगार प्रधान फागों के लिए चर्चित।

रीतिकाल के महत्त्वपूर्ण कवि। निश्छल भावुकता, सूक्ष्म कल्पनाशीलता और सुकुमार भावों के अत्यंत ललित चित्रण के लिए प्रसिद्ध।

भक्तिकाव्य में कृष्ण भक्ति शाखा का चर्चित नाम। राज परिवार में जन्म लेकर भी रजवाड़ों में किए जा रहे स्त्री-शोषण के विरुद्ध खड़ी कवयित्री।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक। लोक-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवि। गद्य-लेखन और साहित्यिक पत्रकारिता में भी सक्रिय।

‘लौटने के लिए जाना’ शीर्षक कविता-संग्रह के कवि। आलोचना में भी सक्रिय।

नवें दशक में सामने आए हिंदी कवि। पर्वतीय लोक-संवेदना के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवि-लेखक। दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवयित्री और अनुवादक। गद्य-लेखन में भी सक्रिय।

नई पीढ़ी की कवयित्री। यात्रा और पत्रकारिता के संसार से संबद्ध।

इस सदी में सामने आए हिंदी कवि-आलोचक और अनुवादक। जन संस्कृति मंच से संबद्ध।

शृंगारी कवि। नायिका के अंग-वर्णन के लिए प्रसिद्ध। एक-एक अंग पर सौ-सौ दोहे लिखने के लिए स्मरणीय।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक। दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

हिंदी में प्रेमाख्यान परंपरा का सूत्रपात करने वाले सूफ़ी कवि।

1000 ई. के आस-पास राजस्थान में हुए विशुद्ध रहस्यवादी जैन कवि। भारतीय अध्यात्म में भावात्मक अभिव्यंजना की अभिव्यक्ति के लिए उल्लेखनीय।

मालवा राज्य के संस्थापक। परमार राजा भोज के चाचा। आचार्य मेरुतुंग की कृति ‘प्रबंध चिंतामणि’ में दोहे संकलित।