कवियों की सूची

सैकड़ों कवियों की चयनित कविताएँ

भक्तिकाल से संबद्ध। राधाकृष्ण के उपासक। गौड़ीय संप्रदाय के महत्वपूर्ण कवियों में से एक।

सुपरिचित कवयित्री और गद्यकार। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

फागों के लिए स्मरणीय कवि।

आधुनिक हिंदी कविता के अग्रणी कवियों में से एक। अपनी कहानियों और डायरी के लिए भी प्रसिद्ध।

बुंदेलखंड के कवि, फागों के लिए स्मरणीय।

अकबर के नवरत्नों में से एक। भक्ति और नीति-कवि। सरस हृदय की रमणीयता और अन्योक्तियों में वाग्वैदग्ध्य के लिए प्रसिद्ध।

‘अकविता’ आंदोलन से संबद्ध रहे हिंदी के समादृत कवि-कथाकार।

बुंदेलखंड की फागों के लिए चर्चित कवि।

नई पीढ़ी की कवयित्री। शोध, गद्य-लेखन और अनुवाद-कार्य में भी सक्रिय।

रीतिकालीन संत। ग़रीब पंथ के प्रवर्तक। राम-रहीम में अभेद और सर्वधर्म समभाव के पक्षधर। कबीर के स्वघोषित शिष्य।

नई पीढ़ी के श्रेष्ठ कवि-कथाकार। सिनेमा के संसार से भी संबद्ध।

द्विवेदी युग के कवि। राष्ट्रप्रेम की कविताओं के लिए प्रसिद्ध।

हिंदी के चर्चित कवि-कथाकार और अनुवादक। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

सातवें दशक के कवि-लेखक। समाजवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।

जीवन के व्यावहारिक पक्ष के आलोक में नीति, वैराग्य और अध्यात्म के प्रस्तुतकर्ता। नीतिपरक कुंडलियों के लिए प्रसिद्ध।

भक्तिकालीन रीति कवि। 'शृंगार मंजरी' काव्य परंपरा के अलक्षित आदिकवि।

वास्तविक नाम गोपालचंद्र। आधुनिक साहित्य के प्रणेता भारतेंदु हरिश्चंद्र के पिता।

अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तार सप्तक’ के कवि। ‘छाया मत छूना’ शीर्षक गीत के लिए चर्चित।

सुपरिचित कवि-लेखक और संपादक। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

सुपरिचित कवि-आलोचक-अनुवादक और संपादक।

रीतिग्रंथ रचना और प्रबंध रचना, दोनों में समान रूप से कुशल कवि और अनुवादक। प्रांजल और सुव्यवस्थित भाषा के लिए स्मरणीय।

सुप्रसिद्ध गीतकार। विद्रोही और प्रगतिशील विचारों के लिए उल्लेखनीय।

हिंदी के बेहद लोकप्रिय गीतकार। पद्म भूषण समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित।

जनवादी विचारों के चर्चित क्रांतिकारी कवि। भोजपुरी में भी लेखन।

प्रसिद्ध नाथ कवि। मत्स्येंद्रनाथ के शिष्य, नाथ संप्रदाय के संस्थापक और नौ नाथों में से एक। समय : 845 ई. के आस-पास।

शृंगार और नीति विषयक कविताओं के लिए ख्यात।

आठवें दशक के कवि। प्रगतिशील लेखक संघ से संबद्ध।

कृष्ण-भक्ति शाखा से संबद्ध। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय के अष्टछाप कवियों में से एक। गोस्वामी विट्ठलनाथ के शिष्य।

रीतिकाल के टीकाकार और अल्पज्ञात कवि।

अत्यंत लोकप्रिय गीतकार और फ़िल्मकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

रीतिकालीन कवि। कलाकुशल और साहित्यमर्मज्ञ। चमत्कारिता के लिए प्रसिद्ध।

वज्रयानी सिद्ध। तंत्रसाधक। जातिवाद के विरोधी और सहज साधना के प्रबल समर्थक। चौरासी सिद्धों में से एक।

रीतिकालीन कवि। ऋतु वर्णन के लिए ख्यात।

सिक्ख धर्म के तीसरे गुरु और आध्यात्मिक संत। जातिगत भेदभाव को समाप्त करने और आपसी सौहार्द स्थापित करने के लिए 'लंगर परंपरा' शुरू कर 'पहले पंगत फिर संगत' पर ज़ोर दिया।

सिक्खों के पाँचवें गुरु और 'गुरुग्रंथ साहिब' के संपादक।

सिक्ख धर्म के आदिगुरु। भावुक और कोमल हृदय के गृहस्थ संत कवि। सर्वेश्वरवादी दर्शन के पक्षधर।

सिक्ख धर्म के चौथे गुरु। अमृतसर के संस्थापक।

रीतिबद्ध कवि। सोलह भाषाओं के ज्ञाता। देशाटन से अर्जित ज्ञान और अनुभव इनकी कविता में स्पष्ट देखा जा सकता है। विदग्ध और फक्कड़ कवि।