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सफर में गर

saphar mein gar

अशोक द्विवेदी

अशोक द्विवेदी

सफर में गर

अशोक द्विवेदी

और अधिकअशोक द्विवेदी

    सफर में गर, साथ मन के मीत बा

    जिन्दगी गति से भरल संगीत बा

    याद आवत बा कहाँ पछिली कड़ी

    अधूरा तोहरे कढ़ावल गीत बा

    सबके आपन ख्याल आपन तर्क बा

    लीखि से भटकल इहाँ के रीत बा

    चेहरा-मोहरा बोली सब एके नियर

    का बताई आजकल, के हीत बा

    तोहके देखला के ललक सुनला के चाह

    काहें हमके तोहसे अतना प्रीत बा?

    पूरा-पूरा बा जिनिगी के सवाद

    मीठ बा कुछ खट बा कुछ कुछ तीत बा

    प्रेम में होला कहाँ केहू के हार

    हार गइले में असली जीत बा

    स्रोत :
    • पुस्तक : फूटल किरिन हजार (पृष्ठ 150)
    • रचनाकार : अशोक द्विवेदी
    • प्रकाशन : पाती प्रकाशन, बलिया
    • संस्करण : 2003

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