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रेडियो पर उद्धरण

शाश्वत साहित्य लिखनेवाला क्रांतदर्शी साहित्यकार भी रेडियो के अहलकारों के सामने झिझककर बात करता है।

श्रीलाल शुक्ल

आकाशवाणी की तरंगों में विचार के लिए कोई स्थान पहले था, आज है। कभी कोई विचार सुनाई पड़ जाए तो रेडियो को खड़खड़ाकर देखना पड़ता है कि यह विचार कहा से अनधिकृत घुस आया।

कृष्ण कुमार

हिन्दवी उत्सव 2026

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