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झूठ पर दोहे

झूठ मिथ्या या असत्य

वचन है। इसे सत्य का छद्म या भ्रम भी कहा जाता है। यहाँ झूठ शब्द-केंद्र पर परिधि पारती कविताओं का एक चयन प्रस्तुत है।

सौ में बोले झूठ जो, सवा सौ सुबह शाम।

असली नेता है वही, बाकी का क्या काम॥

निज़ाम फतेहपुरी

सच से फ़ुर्सत है नहीं, कैसे बोले झूठ।

उसकी दुकान झूठ की, धंधा है मत रूठ॥

निज़ाम फतेहपुरी
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झूठ-झूठ है सच नहीं, सच से जिंदा झूठ।

मिटे झूठ जब सच हटे, जैसे जल कर ठूँठ।

निज़ाम फतेहपुरी
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