झूठ पर दोहे
झूठ मिथ्या या असत्य
वचन है। इसे सत्य का छद्म या भ्रम भी कहा जाता है। यहाँ झूठ शब्द-केंद्र पर परिधि पारती कविताओं का एक चयन प्रस्तुत है।
सौ में बोले झूठ जो, सवा सौ सुबह शाम।
असली नेता है वही, बाकी का क्या काम॥
सच से फ़ुर्सत है नहीं, कैसे बोले झूठ।
उसकी दुकान झूठ की, धंधा है मत रूठ॥
झूठ-झूठ है सच नहीं, सच से जिंदा झूठ।
मिटे झूठ जब सच हटे, जैसे जल कर ठूँठ।