Font by Mehr Nastaliq Web

माया पर ग़ज़लें

‘ब्रह्म सत्यं, जगत मिथ्या’—भारतीय

दर्शन में संसार को मिथ्या या माया के रूप में देखा गया है। भक्ति में इसी भावना का प्रसार ‘कबीर माया पापणीं, हरि सूँ करे हराम’ के रूप में हुआ है। माया को अविद्या कहा गया है जो ब्रह्म और जीव को एकमेव नहीं होने देती। माया का सामान्य अर्थ धन-दौलत, भ्रम या इंद्रजाल है। इस चयन में माया और भ्रम के विभिन्न पाठ और प्रसंग देती अभिव्यक्तियों का संकलन किया गया है।

सांस के बाटे गहना: हमार जिनगी

सतीश्वर सहाय वर्मा ‘सतीश’

मकान बा सटल-सटल

कृष्णानन्द कृष्ण

हिन्दवी उत्सव 2026

रजिस्टर कीजिए