कवियों की सूची

सैकड़ों कवियों की चयनित कविताएँ

सुपरिचित कवि-लेखक। दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवि-आलोचक। ‘साखी’ पत्रिका के संपादक।

संत कवि। सरल और सहज राजस्थानी भाषा। कविता में दैनिक जीवनानुभवों और उदाहरणों से अपनी बात पुष्ट करने के लिए स्मरणीय।

नीतिपरक फागों के लिए प्रसिद्ध।

चरनदास की शिष्या। प्रगाढ़ गुरुभक्ति, संसार से पूर्ण वैराग्य, नाम जप और सगुण-निर्गुण ब्रह्म में अभेद भाव-पदों की मुख्य विषय-वस्तु।

रामानंद के बारह शिष्यों में से एक। जाति-प्रथा के विरोधी। सैन समुदाय के आराध्य।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक और अनुवादक।

नई पीढ़ी की कवयित्री।

सुपरिचित कवयित्री-कथाकार और अनुवादक। संस्कृत भाषा, नृत्य और रंगमंच में भी सक्रियता।

नवें दशक के महत्त्वपूर्ण कवि। अपने काव्य-वैविध्य के लिए उल्लेखनीय। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

नवें दशक में सामने आए हिंदी के महत्त्वपूर्ण कवि-कथाकार और पत्रकार। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

नई पीढ़ी के लेखक और यायावर।

‘मिले बस इतना ही’ शीर्षक कविता-संग्रह के कवि। कम आयु में दिवंगत।

भक्तिकाल के निर्गुण संतकवि। वाणियों में प्रेम, विरह, और ब्रह्म की साधना के गहरे अनुभव। जनश्रुतियों में संत दादू के अवतार।

रीतिकालीन निर्गुण संतकवि और संत बुल्ला साहब के प्रधान शिष्य। वाणियों की मुख्य विषय-वस्तु अध्यात्म, प्रेम और शांति की कामना।

रीतिकाल के निर्गुण संतकवि। संत बुल्ला के शिष्य और 'सतनामी संप्रदाय' के संस्थापक।

संत कबीर के औरस पुत्र और शिष्य।

संत यारी के शिष्य। आध्यात्मिक अनुभव को सरल भाषा में प्रस्तुत करने वाले अलक्षित संत-कवि।

भक्तिकाल। संत गद्दन चिश्ती के शिष्य। लालदासी संप्रदाय के प्रवर्तक। मेवात क्षेत्र में धार्मिक पुनर्जागरण के पुरोधा।

श्री रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्तक। वाणी में प्रखर तेज। महती साधना, अनुभूति की स्वच्छता और भावों की सहज गरिमा के संत कवि।

'राधास्वामी सत्संग' के द्वितीय गुरु। स्पष्ट और सरल भाषा में अनुभवजन्य ज्ञान को अपनी वाणियों में प्रस्तुत किया।

'राधास्वामी सत्संग' के प्रवर्तक। सरस और हृदयग्राह्य वाणियों के लिए प्रसिद्ध।

शिवनारायणी संप्रदाय के प्रवर्तक। वाणियों में स्वावलंबन और स्वानुभूति पर विशेष ज़ोर। भोजपुरी भाषा का सरस प्रयोग।

मनरंगीर के शिष्य। स्वानुभूति के बल पर आध्यात्मिक आदर्श का निरूपण करने वाले संत कवि।

महाराष्ट्र के संत कवि। भक्ति के अभंग पदों के लिए प्रसिद्ध।

नई पीढ़ी के हिंदी कवि-ग़ज़लकार। लोक-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवि। ‘अनहद’ के संपादक और जनवादी लेखक संघ से संबद्ध।

नई पीढ़ी की कवयित्री।

हिंदी-अँग्रेज़ी दोनों में लिखने वाले सुपरिचित कवि, अनुवादक, संपादक और प्रकाशक।

वज्रयानी सिद्ध। हिंदी के प्रथम कवि। सरह, सरहपाद, शरहस्तपाद, सरोजवज्र जैसे नामों से भी चर्चित।

परंपरागत आदर्श पर विशेष बल देने वाली भारतेंदु युग की कवयित्री।

प्राचीन काव्य के ख्यातिप्राप्त टीकाकार और अलक्षित कवि।

आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख कवि और नाटककार। अपनी पत्रकारिता के लिए भी प्रसिद्ध। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

भारतेंदु युग के कवि। ब्रजभाषा काव्य-परंपरा के अंतिम कवियों में से एक।

नवें दशक के कवि। जनवादी लेखक संघ से संबद्ध।

सुपरिचित कवि-लेखक और अनुवादक। साहित्यिक पत्रकारिता से भी संबद्ध।

सुपरिचित कवयित्री। स्त्रीवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवयित्री और आलोचक। हिंदी कविता में स्त्रीवादी वैचारिकी के निर्माण में अहम भूमिका।

‘निज कवि धातु बचाई मैंने’ शीर्षक कविता-संग्रह के कवि। लोक-संवेदना के लिए उल्लेखनीय।

ब्रजभाषा के भक्त कवि। टट्टी संप्रदाय से संबद्ध।

भक्तिकाल और रीतिकाल के संधि कवि। ऋतुवर्णन और ललित पदविन्यास के लिए प्रसिद्ध। शृंगार के अतिरिक्त भक्तिप्रेरित उद्गारों के लिए भी स्मरणीय।

भक्तिपरक फागों के लिए प्रसिद्ध।

निरंजनी संप्रदाय के रहस्यवादी संत कवि।

सेवक

1815 -1881

रीतिकालीन अलक्षित कवि।

हिंदी-अँग्रेज़ी कवि-लेखक। प्रतिष्ठित प्रकाशनों स्थलों पर रचनाएँ प्रकाशित।

‘कर्मनाशा’ कविता-संग्रह के कवि। बतौर अनुवादक भी उल्लेखनीय।

द्विवेदीयुगीन कवि। हिंदी की गांधीवादी राष्ट्रीय धारा के प्रतिनिधि कवि के रूप में समादृत।

हिंदी की समादृत कवयित्री। प्रसिद्ध साहित्यकार अजित कुमार की जीवन-संगिनी।