कवियों की सूची

सैकड़ों कवियों की चयनित कविताएँ

भक्तिकाल। रामभक्त कवि। अग्रदास के शिष्य। 'भक्तमाल' ग्रंथ कीर्ति का आधार ग्रंथ।

सुचर्चित गीतकार।

आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख कवि और कथाकार। अपने जनवादी विचारों के लिए प्रसिद्ध। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

किशनगढ़ (राजस्थान) नरेश। प्रेम, भक्ति और वैराग्य की साथ नखशिख की सरस रचनाओं के लिए ख्यात।

समादृत कवि-आलोचक। ‘नकेनवाद’ आंदोलन के तीन सूत्रधारों में से एक।

बिसोवा खेचर के शिष्य और वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संत। सगुण-निर्गुण में अभेद स्थापित करते हुए सैकड़ों अभंग पदों के रचनाकार।

पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय के अष्टछाप कवियों में से एक। गोस्वामी विट्ठलदास के शिष्य। पदों के शिल्प-वैशिष्ट्य के कारण प्रसिद्ध।

कृष्ण-भक्ति के संत कवि। सुकोमल भाषा और विलक्षण भाव-वर्णन के लिए स्मरणीय।

सूफ़ी कवि। राजस्थानी मिश्रित ब्रजभाषा का प्रयोग।

नवें दशक में उभरे कवि। लोकधर्मी चेतना से संपन्न।

सुविख्यात कवि-गीतकार और संपादक। सिनेमा के लिए लिखे गए गीतों के लिए भी चर्चित।

चर्चित कवि-लेखक। आलोचना और संपादन में भी सक्रिय।

सातवें दशक के कवि। कहन में संक्षिप्तता, स्मृति और कविता-पाठ के लिए उल्लेखनीय।

कृष्ण-भक्त कवि। सरस और हृदयग्राहिणी रचना ‘सुदामा चरित’ प्रसिद्धि का आधार-ग्रंथ।

अजमेर के राजा विग्रहराज चतुर्थ के राजकवि। वीरगीत के रूप में सबसे पहली कृति 'बीसलदेव रासो' के रचयिता।

रीतिकालीन नीतिकाव्य के अलक्षित कवि।

नवें दशक में उभरे कवि। कथा-लेखन और संपादन में भी सक्रिय।

हिंदी के अत्यंत उल्लेखनीय कवि-कथाकार।

दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय कवि-कथाकार।

आठवें दशक के कवि-लेखक और संपादक। संस्मरण-लेखन और अनुवाद-कार्य के लिए भी उल्लेखनीय।

नवें दशक की महत्त्वपूर्ण कवयित्री। ‘एक क़स्बे के नोट्स’ शीर्षक उपन्यास के लिए उल्लेखनीय। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित

इस सदी में सामने आए कवि। ‘अनाज पकने का समय’ शीर्षक कविता-संग्रह के लिए चर्चित।

नई पीढ़ी की कवयित्री। स्त्रीवादी विचारों के लिए उल्लेखनीय।

अज्ञेय द्वारा संपादित ‘तार सप्तक’ के कवि। आलोचना और नाट्य-समीक्षा में भी सक्रिय रहे।

रीतिकालीन कवि। परिमार्जित, व्यवस्थित और भावानुरूप भाषा के लिए स्मरणीय।

सुपरिचित कवि। गद्य-लेखन और पत्रकारिता में सक्रिय।

नवें दशक के कवि। उपन्यास और नाट्य-लेखन में भी सक्रिय।

नाथ परंपरा के कवि। चर्पटनाथ के शिष्य। असार संसार में लिप्त जीवों की त्रासदी के सजीव वर्णन के लिए स्मरणीय।

सुपरिचित कवि-लेखक और 'समावर्तन' पत्रिका के संपादक।

नवें दशक की कवयित्री। जनवादी संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवयित्री। आदिवासी संवेदना-सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

सुपरिचित कवि-लेखक और अनुवादक। भारतीय ज्ञानपीठ के नवलेखन और भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

प्रेमाख्यान परंपरा के अंतिम कवि।