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दण्डी

संस्कृत के महाकवि और काव्यशास्त्र के आचार्य। 'दशकुमारचरितम्' और 'काव्यादर्श' जैसी कृतियों के लिए समादृत।

संस्कृत के महाकवि और काव्यशास्त्र के आचार्य। 'दशकुमारचरितम्' और 'काव्यादर्श' जैसी कृतियों के लिए समादृत।

दण्डी के उद्धरण

कठिन कार्य का साधन बुद्धि है।

अन्यायपूर्वक दिए गए दंड ने भय और क्रोध को जन्म दिया।

राजनीति और श्रेष्ठ कर्मों के आरंभ के मूल में धन ही होता है।

अवज्ञा जिसकी बहिन है, वह है दारिद्र्य।

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