Font by Mehr Nastaliq Web

रउरा सासन के ना बड़ुए जवाब भाईजी

raura sasan ke na baDue javab bhaiji

विजेन्द्र अनिल

विजेन्द्र अनिल

रउरा सासन के ना बड़ुए जवाब भाईजी

विजेन्द्र अनिल

और अधिकविजेन्द्र अनिल

    रउरा सासन के ना बड़ुए जवाब भाईजी,

    रउरा कुरूसी से झरेला गुलाब भाईजी

    रउआ भोंभा लेके सगरे अंवज करीला,

    हमरा मुंहवा डलले बानीं जाब भाईजी

    हमरा झोपड़ी में मटियो के तेल नइखे,

    रउरा कोठिया में बरे मेहराव भाईजी

    राउर छंवड़ा पढ़ेला बेलाइत जाइ के

    हमरा छंवड़ा के मिले ना किताब भाईजी

    रउरा बुढ़िया के गलवा क्रीम लागेला,

    हमरा नयकी के जरि गइल ख्वाब भाईजी

    रउरा कनखी थाना अउर जेहल नाचेला,

    हमरा मुअलो होला ना हिसाब भाईजी

    चाहे दंगा करवाईं, चाहे गोली चलवाईं,

    'देसभक्तवा' के मिलल बा खिताब भाईजी

    कइसन लोकसाही, लड़े जनता से सिपाही,

    केहू मरे, केहू ढारेला सराब भाईजी

    अब ना सहब अत्याचार, बनी हमरो सरकार,

    नाहीं सहब अब राउर कवनो दाब भाईजी

    चाहे हथकड़ी लगाईं, चाहे गोली से उड़ाईं,

    हम पढ़व अब ललकी किताब भाईजी।

    स्रोत :
    • पुस्तक : हम कबीर के बानी (चयन : अरविन्द कुमार) (पृष्ठ 36)
    • रचनाकार : विजेन्द्र अनिल
    • प्रकाशन : संरचना प्रकाशन, आरा
    • संस्करण : 2009

    Additional information available

    Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.

    OKAY

    About this sher

    Close

    rare Unpublished content

    This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.

    OKAY

    हिन्दवी उत्सव 2026

    रजिस्टर कीजिए