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शायक आलोक

1983 | बेगूसराय, बिहार

नई पीढ़ी के सुपरिचित कवि-गद्यकार।

नई पीढ़ी के सुपरिचित कवि-गद्यकार।

शायक आलोक के बेला

13 दिसम्बर 2024

जो बचा है वह है बस शब्दों का एक नगर

जो बचा है वह है बस शब्दों का एक नगर

मैं, पम्पा कम्पाना, हूँ इस कृति की रचयिता/ मैंने एक साम्राज्य का उत्थान और पतन देखा है/ अब उन्हें कैसे याद करता है कोई, उन राजाओं और उन रानियों को?/ अब वे बचे हैं बस शब्दों में/ वे थे तो थे विजेता या

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