संस्कार पीपलवा के बेला
लंबी कविताओं पर खुलकर हुई बहस : ‘अर्थात्’ की पाँचवीं कड़ी रही ख़ास
‘चेख़व के कथा-साहित्य का सौंदर्यशास्त्र’ पर केंद्रित रही ‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी के बाद इस बार विवेचना का विषय रहा—‘हिंदी की लंबी कविताएँ और उनका पुनर्पाठ’। इस पाँचवें आयोजन में बतौर वक्ता कवि-द्वय—देव