इक़बाल अशरफ़ सिमनानी के बेला
ईदगाह की सरज़मीं : प्रेमचंद और गोरखपुर
जब कभी ईद आती है या ईद का ज़िक्र छिड़ता है, एक कहानी और उसके किरदार अपने-आप ज़ेहन में उतर आते हैं—प्रेमचंद की ‘ईदगाह’, हामिद और दादी अमीना। हामिद का चिमटा, उसकी क़ुर्बानी और दादी के प्रति उसका बेपनाह