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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

रचनात्मकता और द्वंद्व राही डूमरचीर

 

पेड़-पौधों की ही तरह हर रचनाकार अपनी मिट्टी, अपने परिवेश की उत्पत्ति होता है । मेरा यह कहना बेहद सामान्य कथन है । यह तो कहा जाता ही रहा है । फिर मैं नया क्या कह रहा हूँ? मैं नया बिल्कुल नहीं कह रहा।  म

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05 अप्रैल 2026

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