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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

अस्सी : ‘तय करो, इसके नीचे हम नहीं फिसलेंगे’

 

‘अस्सी’ आपको झकझोरती है, असहज करती है। वह ऐसे प्रश्न सामने रखती है, जिन्हें हम वर्षों से टालते आए हैं। वह हमें हमारे ही समय के कठोर सच से रूबरू कराती है। क्यों आज भी इस देश में प्रतिदिन लगभग अस्सी बला

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13 मार्च 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

तुषार धवल

सुपरिचित कवि-अनुवादक। चित्रकला, फ़ोटोग्राफ़ी और अभिनय से भी जुड़ाव।

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