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चाँदनी पर ग़ज़लें

चाँदनी चाँद की रोशनी

है जो उसके रूप-अर्थ का विस्तार करती हुई काव्य-अभिव्यक्ति में उतरती रही है।

आदमी आदमी में होखेला

जौहर शफियाबादी