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ग्लानि पर उद्धरण

उत्तम कोटि के मनुष्यों को अपने दुष्कर्म पर ग्लानि होती है, और मध्यम कोटि के मनुष्यों को अपने दुष्कर्म के किसी कड़वे फल पर।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

अकारण अपमान पर जो ग्लानि होती है, वह अपनी तुच्छता, अपनी सामर्थ्यहीनता पर ही होती है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

ग्लानि अंत:करण की शुद्धि का एक विधान है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

चाहे वह जो भी करता वह अपने आप को अपराधी समझता था—एक महान पापी।

पीएत्रो चिताती

हम अपना मुँह दिखाकर लज्जा से बच सकते हैं, पर ग्लानि से नहीं।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल