जगत के ऊपर मन का कारख़ाना बैठा हुआ है और मन के ऊपर विश्वमन का कारख़ाना है—उसी ऊपरवाले तल्ले में साहित्य की उत्पत्ति होती है।
महान् लक्ष्य को लेकर चलने वाले पुत्र को, दुराग्रही पिता की कोई परवाह नहीं करनी चाहिए और सब छोड़कर घर से भाग जाना चाहिए।