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सांप्रदायिकता पर गीत

सांप्रदायिकता संप्रदाय

विशेष से संबद्धता का प्रबल भाव है जो हितों के संघर्ष, कट्टरता और दूसरे संप्रदाय का अहित करने के रूप में प्रकट होता है। आधुनिक भारत में इस प्रवृत्ति का उभार एक प्रमुख चुनौती और ख़तरे के रूप में हुआ है और इससे संवाद में कविताओं ने बढ़-चढ़कर भूमिका निभाई है। इस चयन में सांप्रदायिकता को विषय बनाती और उसके संकट को रेखांकित करती कविताएँ संकलित की गई हैं।

हम केकर केकर हाल बताईं

रामजियावान दास ‘बावला’

कइसे कहीं की भारत हौ

रामजियावान दास ‘बावला’

अब कइसे बचबऽ भइए!

तैयब हुसैन पीड़ित