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यशवंत दिनकर पेंढरकर

1899 - 1985 | सतारा, महाराष्ट्र

यशवंत दिनकर पेंढरकर के उद्धरण

देश जिनका देवता है, उसकी सेवा जिनका धर्म है, दासता से उसकी मुक्ति जिनका ध्येय है और जो काल को मार्कण्डेय के समान जीत लेते हैं—आओ, हम उनकी आरती गाएँ।

यहाँ कौन किसको तसल्ली दे? सभी एक से दुःखित और व्रस्त हैं।

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