सियारामशरण गुप्त के उद्धरण

मन में जब दुःख देवता का आगमन हो, उस समय उसका सबसे बड़ा आदर यही हो सकता है कि उसे पाकर मनुष्य अपना खान-पान तक भूल जाय। दुःख के बीच में ऐसा आनंद न हो तो उसे ग्रहण ही कौन करे?
-
शेयर
- सुझाव
- प्रतिक्रिया