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Siyaramsharan Gupt's Photo'

सियारामशरण गुप्त

1895 - 1963 | चिरगाँव, उत्तर प्रदेश

द्विवेदीयुगीन कवि। हिंदी की गांधीवादी राष्ट्रीय धारा के प्रतिनिधि कवि के रूप में समादृत।

द्विवेदीयुगीन कवि। हिंदी की गांधीवादी राष्ट्रीय धारा के प्रतिनिधि कवि के रूप में समादृत।

सियारामशरण गुप्त के उद्धरण

मन में जब दुःख देवता का आगमन हो, उस समय उसका सबसे बड़ा आदर यही हो सकता है कि उसे पाकर मनुष्य अपना खान-पान तक भूल जाय। दुःख के बीच में ऐसा आनंद हो तो उसे ग्रहण ही कौन करे?

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