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रवीन्द्र आरोही

सुपरिचित कथाकार।

सुपरिचित कथाकार।

रवीन्द्र आरोही के बेला

16 जून 2026

जीते चले जाने को पीछे मुड़कर देखना

जीते चले जाने को पीछे मुड़कर देखना

पेड़ों को अपने पुराने वसंत और पतझड़ याद नहीं रहते। हम अपने मौसम जीने से ज़्यादा याद रखते हैं। मौसम बाहर से ज़्यादा भीतर बीतते हैं। पतझड़ एक लेखक का आदिम आवास है। जहाँ निर्विकार रूप से पत्ते झड़ रहे ह

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