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जी. शंकर कुरुप

1901 - 1978 | एर्नाकुलम, केरला

समादृत मलयाली कवि, निबंधकार और समालोचक। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित पहले साहित्यकार।

समादृत मलयाली कवि, निबंधकार और समालोचक। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित पहले साहित्यकार।

जी. शंकर कुरुप के उद्धरण

मेरा जीवन मरुभूमि बन गया है।

वही मनुष्य धन्य है जो स्वधर्म में रत है।

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