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रीतिबद्ध के आचार्य कवि। काव्यांग-निरूपण में सिरमौर। शृंगार-निरूपण के अतिरिक्त नीति-निरूपण के लिए भी उल्लेखनीय।

रीतिबद्ध के आचार्य कवि। काव्यांग-निरूपण में सिरमौर। शृंगार-निरूपण के अतिरिक्त नीति-निरूपण के लिए भी उल्लेखनीय।

भिखारीदास के दोहे

तजि आसा तन, प्रान की, दीपै मिलत पतंग।

दरसाबत सब नरन कों, परम प्रेंम कौ ढंग॥

जीबन-लाभ हमें, लखै स्याम-तिहारी काँति।

बिनाँ स्याम-घन-छन प्रभा, प्रभा लहै किहि भाँति॥

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