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गिफ़्ट्स

gifts

अनुवाद : तुषार पांडेय

शू तिंङ्

शू तिंङ्

गिफ़्ट्स

शू तिंङ्

और अधिकशू तिंङ्

    मेरा सपना—सपना है एक तालाब का

    जो केवल करता है प्रतिबिंबित आसमान को

    बल्कि वह जो ख़ुद को देता है सुखा

    जलकुम्भी और नीलगिरी के लिए

    मैं चढ़ जाऊँगा जड़ों से नसों तक

    और जब पत्तियाँ मुरझाकर लगेंगी झरने

    तब मैं नहीं करूँगा शोक

    चूँकि मैं मरा था जीवन के लिए

    मेरी ख़ुशी—ख़ुशी है सूर्य किरण की

    जो सृजन के क्षणों में

    छोड़कर जाएगी चमकते शब्द

    जो चमकेंगे एक स्वर्णिम लौ की तरह

    बच्चों की आँखों की पुतलियों में

    जब भी अंकुर फूटेगा

    मैं हरियाली के गीत गाऊँगा

    गहन-गहन कहकर देखो

    मैं सरल-सरल बहता हूँ!

    मेरा दुःख—दुःख है पक्षियों का

    जिसे समझेगा वसंत :

    असफलताओं के मध्य कठिनाइयों से उड़ना

    एक सुनहरे और उज्ज्वल भविष्य के लिए

    मेरे ख़ून से सने पंख

    जो खरोंच देंगे एक चित्रलेख

    आने वाले हर साल के लिए

    हर इंसान के दिल पर

    क्योंकि

    मैं जो कुछ हूँ

    वह एक है उपहार धरती से मिला।

    स्रोत :
    • पुस्तक : सदानीरा पत्रिका
    • संपादक : अविनाश मिश्र
    • रचनाकार : शू तिंङ्

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